फ़िक्र : #BlogchatterA2Z

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कहते हैं चिन्ता चिता समान है पर फिर भी हम इसके सामने अक्सर हथियार डाल देते हैं | सुबह उठने की फ़िक्र, देर हो जाने की फ़िक्र, भीड़ की फ़िक्र, काम की फ़िक्र, कमाई की फ़िक्र, बीमारियों की फ़िक्र, अपनों को अकेले छोड़ जाने की फ़िक्र और न जाने क्या-क्या ?! अगर हिसाब लगाया जाए तो चिन्ताओं का कोई हिसाब ही नहीं | इसलिए मेरा मानना है कि एक शाँत और संतुष्ट जीवन जीने के लिए सबसे पहले इस फ़िक्र को परास्त करना होगा | तो इस भागदौड़ भरी ज़िंदगी में आख़िर हम फ़िक्र करें भी तो किसकी ?

जिसके होने की आस नहीं,

कुछ पाने का आभास नहीं,

तो ज़िक्र क्यूँ? तो फ़िक्र क्यूँ?

हो जिसकी पूरी अरदास नहीं,

सपनों में जो कोई खास नहीं,

तो ज़िक्र क्यूँ? तो फ़िक्र क्यूँ?

पँखों तले हो आकाश नहीं,

ख़्वाबों में जिसके श्वास नहीं,

तो ज़िक्र क्यूँ? तो फ़िक्र क्यूँ?

कर फ़िक्र तू गर, सवेरा न हो,

कुछ दिखे नहीं, पर अंधेरा न हो,

है दिल की कही, कर फ़िक्र सही,

हो काव्य में गर अल्फ़ाज़ नहीं,

गर हँसी में हो एहसास नहीं,

जीवन में हो परिहास नहीं,

हो घनिष्ट कोई गर पास नहीं,

हो खुद पे गर विश्वास नहीं,

घर में ममता का वास नहीं,

कठिनाई का अभ्यास नहीं,

गिर कर उठने की प्यास नहीं,

यारों का हर्ष-उल्लास नहीं,

हँसने के तर्क पचास नहीं,

तो फ़िक्र तू कर, पर जाने दे,

चल उठ कुछ कर, न बहाने दे,

तू वक़्त की रेत को ढाल ज़रा,

खून-पसीना मिल जाने दे,

फिर फ़िक्र कहाँ? और चिंता क्यूँ?

के ज़िंदगी को ज़रा मुस्कुराने दे,

जो होना है, उसे आने दे,

जो होना है, उसे आने दे ||

*** -doc2poet

अगर आपको मेरी कविताएँ पसन्द आयें तो मेरी पुस्तक “मन-मन्थन : एक काव्य संग्रह” ज़रूर पढ़ें| मुझे आपके प्यार का इन्तेज़ार रहेगा |

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16 thoughts on “फ़िक्र : #BlogchatterA2Z

  1. बहुत सही कहा । फिक्र क्यों करे, जो होना है हो कर रहेगा । फिक्र या चिंता करने से बदल नहीं जाएगा ।

    Liked by 1 person

  2. I haven’t read Hindi poetry or prose before but could understand the essence behind this one very well. I am myself a very fearful person which I want to change about myself. So I have also written on my aspiration of becoming a fearless person today.

    Liked by 1 person

  3. चिंता से चतुराई घटे, घटे रूप और ज्ञान चिंता बड़ी अभागिनी, चिंता चिता समान
    मेरो चिंतयों होत नहीं, हरि चिंतयों हरि करे
    मैं रहुं निश्चित

    Liked by 2 people

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