जुस्तजू : #BlogchatterA2Z

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Jयह वो समय था जब मैं लड़कपन के जोश में, बेबाक, बेफिक्र, मदमस्त हाथी की तरह चला जा रहा था | संतुष्ट जीवन की छाँव तले मेरे ह्रदय में बस एक ही आस थी | उन हसीन पलों में हर रंग थोड़ा और रंगीन लगता है, हर चेहरा आफरीन लगता है, इन हवाओं में एक नशा सा घुल जाता है और हर स्वाद तोड़ा और नमकीन लगता है |

इस  दिल  से  उठती  ख़ुश्बू  के  कुछ  कतरे  आपकी नज़र  करता हूँ: 

तकते  थे  राह  उनकी,

इस   कशमकश  में  यूँही  ग़ज़ल  बन  गयी,

के   दिल  में  उठा  एक  ख़याल,

और  मुश्किल  ख़ुद  हल  बन  गयी ||

♥ ♥ ♥                                       doc2poet

वो   कहते   हैं   तू   ख़याल   है   बस,

इस   पागल   दिल   का   फ़ितूर   है   तू,

पर   ज़िंदा   हूँ   मैं, खुद   सुबूत   है   ये ,

के   शायद   कहीं   ज़रूर   है   तू ||

♥ ♥ ♥                                       doc2poet

ढूँढता  हूँ  तुझे  इन  लकीरों  में,

के  तेरी  ख़्वाहिश  बेइंतहाँ  है ,

  बसा  है  तेरा  अक्स  इस  दिल  में,

पर  जाने  तू  कहाँ  है, जाने  तू  कहाँ  है ||

♥ ♥ ♥                                       doc2poet

तेरे   ख़यालों   में   ऐसा   डूबा,

जैसे   वर्षा   घनघोर   हुई,

जाने   कब   बीती   रात ,

और   जाने   कब   भोर   हुई ||

♥ ♥ ♥                                       doc2poet

तेरा  नाम  लबों  से  गुज़रे  अरसा  हुआ,

पर  मुस्कुराहट  अभी  बाकी  है,

कैसे  भुला  दूँ  तुझे  ए  हमनशीं,

के  चाहत  अभी  बाकी  है ||

♥ ♥ ♥                                       doc2poet

ख़्वाब  में  मिलीं  कल नज़रें उनसे,

जाने दो पल में क्या कह गयीं,

हम अंदाज़-ए-बयाँ पर ही मर मिटे,

और बात अधूरी रह गयी ||

♥ ♥ ♥                                       doc2poet

ये  तू  नहीं, तेरी  याद है बस,

अब  कौन इस दिल को समझाए,

तेरी  जुस्तजू ने शायर  किया,

एक  झलक  जाने  क्या कर जाए ||

♥ ♥ ♥                                       doc2poet

अगर आपको मेरी कविताएँ पसन्द आयें तो मेरी पुस्तक “मन-मन्थन : एक काव्य संग्रह” ज़रूर पढ़ें| मुझे आपके प्यार का इन्तेज़ार रहेगा |

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14 thoughts on “जुस्तजू : #BlogchatterA2Z

  1. मेरे पास शब्द्द नहीं है | दिलों को छूने वाली है हर पंक्ति | दिल से उठती खुशबु के साथ दिल से उठता दर्द भी महसूस हो रहा है।

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    1. गर जादू केवल शब्दों में होता, तो शायर ज़रा और आम होते;
      कुछ तो बात सुनने वालों में भी ज़रूर होती है …|| 🙂

      Liked by 1 person

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