कर्तव्य : BlogchatterA2Z

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K              ये पंक्तियाँ समर्पित हैं मेरे पुत्र कर्तव्य की मीठी मुस्कान को, उसकी नादान शरारतों को, उसकी हर एक बात को जिसमें मैं अपना भविष्य, अपना प्रतिबिम्ब, अपना सब कुछ देखता हूँ |

तू  काव्य  मेरा, कर्तव्य  मेरा,
तू  भूत, वर्तमान, भविष्य  मेरा;

तू  अठखेली, तू  ही  बचपन,
उगता  सूरज  तू  भव्य  मेरा;

तू  गर्व  मेरा, ऐश्वर्य  मेरा,
तुझसे  ही  भाग्य  अदम्य  मेरा;

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My son- Kartavya

तुझसा  दूजा  कोई  भी  नहीं,
के  तू  है  प्रदेय  अनन्य  मेरा;

मैं  चलूँ  तू  मंज़िल  पा  जाए,
के  तू  ही  है  गंतव्य  मेरा,   

कर्तव्य  मेरा,  गंतव्य  मेरा||

♥ ♥ ♥                                       doc2poet

अगर आपको मेरी कविताएँ पसन्द आयें तो मेरी पुस्तक “मन-मन्थन : एक काव्य संग्रह” ज़रूर पढ़ें| मुझे आपके प्यार का इन्तेज़ार रहेगा |

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16 thoughts on “कर्तव्य : BlogchatterA2Z

  1. कर्त्तव्य। बहुत अच्छा नाम है। वह बहुत भाग्यशाली है आपको पिता रूप पा कर।

    Liked by 1 person

  2. shwetadave

    While this is beautiful, it is equally powerful. I can see the love and pride in these lines that just flows. No wonder you wrote this for your son, it shows 🙂 Very beautiful!

    Liked by 1 person

    1. Words are the most magical things to have ever existed. It isn’t easy to reflect all your feelings in poetry. Glad you could see what lies behind these words. I am humbled. 😊

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