पहला प्यार: #FirstCrush

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तकते  थे  राह  उनकी, के  यादों  की  कशमकश  में  यूँही  ग़ज़ल  बन  गयी,

इस  दिल  में  उठा  एक  ख़याल, और  मुश्किल  ख़ुद  हल  बन  गयी ||

मेरे पहले प्यार का बीज तब अंकुरित हुआ

जब उन्होंने पहली बार मेरे ख़्वाबों के दरवाज़े पर दस्तक दी,

उन ख़ूबसूरत पलों को शब्दों में कुछ इस तरह तराशा है…


पहला प्यार पहला एहसास 

ख़यालों ने  उनके  सताया  है  इस  क़दर,  के  राबता  हो  उनसे….तो  पूछेंगे  ज़रूर ,

के तराशा  है  तुम्हें  खुद  उस  ख़ुदा  ने,  या  हो  तुम  परी….या  कोई  हूर ;

है  तुमसे  ही  धड़कन  इस  दिल  की,  और  तुम्ही  से  इन  आँखों  का  नूर ,

के  मर  ही  मिटा  तुमपर, तो  इस  दिल  का  क्या  क़सूर ;

इस  दिल  ने  ही  दिखाई  अंधेरों  में , नज़रों  को  राहें  तमाम  हैं,

माना  हुई  है  इससे  ख़ता,   पर  क़ुबूल  हमें  भी  ये  ख़ूबसूरत  इल्ज़ाम  है ;

न  जाने  हुआ  ये  कैसे ,   के  एक   ही   झलक  में  दिल-ओ-जान  गवाँ  बैठे,

अजनबी  हुए  ख़ुद  से,  और  उन्हे  भगवान  बना  बैठे ;

जादू  चला  उनका  कुछ  इस  तरह , के  हम…रहे  नहीं  हम,

मिल  जाए  पर उनका   साथ  अगर ,   तो  ख़ुद  को  खोने  का  भी  न  हो  ग़म ;

के उनकी  नज़रों  में छलकती अपनी  तस्वीर  सा  नशा, किसी   पैमाने   में  कहाँ ,

के  मुहब्बत  की  इस  बेखुदी  सा   मज़ा, होश  में  आने  में  कहाँ ;

बयाँ  कर पाना मुम्किन नहीं ,  के   बीते  कैसे  बरसों… इन  नज़रों  की  तलाश  में,

ज़िंदा  होने  के  इल्ज़ाम  तले ,  चल थी  रही  साँसें…ज़िंदगी  की  आस  में ;

के  लौ  सी   तपती  धूप  में ,   राहत…शाम  में  हमने  पाई  है ,

गुज़र  गये  झुलस्ते  मंज़र,    के  जीवन  में  शब  लौट  आई  है ;

सजदा  करूँ  मैं  पल-पल  उनका,  जो  शख्सियत  ही  ख़ुदाया  है,

के   याकता  वो  हीर,    जिसने  इस  दिल  को  सजाया  है ;

इस  दिल  को  सजाया  है, हर पल को महकाया है ||


ये इस कविता का अंत नहीं, बल्कि इस प्रेम कहानी का आगाज़ है…

This post is written for Indispire Edition 101: First Crush is special. Isn’t it? It must have been on a teacher, an actor, a classmate, a friend, a neighbor or just a random stranger. Share the beautiful memories of your first crush with us.#firstcrush .

महकते जज़्बात…(5)


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इस  दिल  से  उठती  ख़ुश्बू  के  कुछ  और  कतरे  आपकी  नज़र  करता  हूँ…

भाग ५


वो   कहते   हैं   तू   ख़याल   है   बस ,

इस   पागल   दिल   का   फ़ितूर   है   तू ;

पर   ज़िंदा   हूँ   मैं…खुद   सुबूत   है   ये ,

के   शायद   कहीं   ज़रूर   है   तू ||

♥ ♥ ♥

तेरे   ख़यालों   में   ऐसा   डूबा,

जैसे   वर्षा   घनघोर   हुई ;

जाने   कब   बीती   रात ,

और   जाने   कब   भोर   हुई ||

♥ ♥ ♥

ख्वाबों   के   इस   वीराने   में ,  

 क्या   खूब   हरियाली   छाई   है ;

के   ढूंड   रहे   थे   हम   अल्फाज़ों   को ,  

और…खुद   ग़ज़ल   ही   चली   आई   है ||

♥ ♥ ♥

Love  is  in  the  air…Its  February…