उड़ान : BlogchatterA2Z

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जीने के लिए जैसे हवा, पानी, भोजन ज़रूरी है वैसे ही कम से कम एक सपना तो ज़रूर होना चाहिए | एक ऐसा सपना जो आपको चैन से सोने न दे, आपको एक बार और उठकर चने की प्रेरणा दे | चाहे सपना छोटा हो या बड़ा, सपना तो सपना होता है जिसके बिना ये जीवन जैसे अधूरा ही है |

उड़ने दो मेरे सपनों को,

के घर इनका आकाश है;

मत जकड़ो इन्हें लकीरों में,

के ध्येय इनका बस तलाश है;

इनके जानिब संतोष नहीं,

के हँसती इनकी कुछ ख़ास है;

मंज़िल से इनका क्या नाता,

इनको चलने की बस प्यास है;

के मंज़िल में क्या रखा है,

गर सफ़र पे अपने नाज़ है;

के गीत कई गुनगुनाने हैं अभी,

और समय ही अपना साज़ है ||

♥ ♥ ♥ doc2poet

अगर आपको मेरी कविताएँ पसन्द आयें तो मेरी पुस्तक “मन-मन्थन : एक काव्य संग्रह” ज़रूर पढ़ें| मुझे आपके प्यार का इन्तेज़ार रहेगा |

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बहुत देर हो चुकी शायद…

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Source here

It  is  never  too  late…


आहिस्ता  चल  ए  ज़िन्दगी , कुछ क़र्ज़   चुकाना  बाकी  है,

कुछ  दर्द  मिटाना  बाकी  है, कुछ  फ़र्ज़  निभाना  बाकी  है,

रफ़्तार  में  तेरे  चलने  से, कुछ  रूठ  गये – कुछ  छूट  गये,

उन  रूठों  को  मनाना  बाकी  है, रोतों  को  हँसाना  बाकी  है,

इन  साँसों  पर  हक़  है  जिनका, उनको  समझाना  बाकी  है,

कुछ  हसरतें  अभी  अधूरी  हैं, कुछ  काम  और  अभी   ज़रूरी  हैं,

ख़्वाहिशें  कुछ  घुट  गयी  इस  दिल  में, उनको  दफ़नाना  बाकी  है,

नई  ख्वाहिशें  जगाना  बाकी  है, कुछ  ख़्वाब  सजाना  बाकी  है,

कुछ  आँसू  हैं  तो  कुछ  ग़म  भी  हैं, उनको  हँसी  तले  दबाना  बाकी  है,

कहीं  मरहम  लगाना  बाकी  है, कुछ  ज़ख़्म  छिपाना  बाकी  है,

तू  आगे  चल  मैं  आता  हूँ, के  अभी  कदम  बढ़ाना  बाकी  है ,

कुछ  और  सबक  हैं  तेरे  दामन  में, उनसे  मिल  जाना  बाकी  है,

के  वक़्त  से  इस  दौड़  में, उम्मीदें  तो  बस  अभागी  हैं,

घड़ी  के  काँटे  कभी  रुका  करते  नहीं, इन्हें  पकड़  पाना  अभी  बाकी  है,

बहुत देर हो चुकी शायद, पर ख़्वाब अभी कुछ बाकी हैं, 

के  आहिस्ता  चल  ए  ज़िंदगी, कुछ  क़र्ज़  चुकाना  बाकी  है ||

***

This post is a part of Write Over the Weekend, an initiative for Indian Bloggers by BlogAdda. Although this is an old composition but I think it falls perfectly for this prompt, hope you like it:-)

ख्वाबों की कीमत: #If Money Disappeared

Indian Bloggers

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कभी  मिलती  नहीं  मंज़िल, तो  कभी  राहें  रूठ  जाती  हैं,
के  इन  सिक्कों  के  बोझ  तले, ख्वाहिशें  टूट  जाती  हैं;

ख़्वाब  अक्सर  अधूरे  रह  जाया  करते  हैं,
के  खर्चा  बहुत  हो  जाता  है, मंज़िलों  को  पाने  में;

सुनहरे  ये  सपने  खरीदे  गर  जाते  हौसलों  से,
रंग  कुछ  और  ही  होता,  कामयाबी  के  इंद्रधनुशों   का;

ए  ख़ुदा  अदा  करना  हर  उस  दिल  की  दुआ,
जिसमें  तुझे  अक्स  अपना  दिखाई  दे ||

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This post is a part of Write Over the Weekend, an initiative for Indian Bloggers by BlogAdda. This weekend’s WOW prompt is- “If Money Disappeared”.

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उड़ान: #BucketList

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The bucket list is never meant to exhaust,

and true passion is never lost.


Dreams-Passion-Life

उड़ने दो मेरे सपनों को,

के घर इनका आकाश है;

मत जकड़ो इन्हें लकीरों में,

के ध्येय इनका बस तलाश है;

इनके जानिब संतोष नहीं,

के हँसती इनकी कुछ ख़ास है;

मंज़िल से इनका क्या नाता,

इनको चलने की बस प्यास है;

के मंज़िल में क्या रखा है,

गर सफ़र पे अपने नाज़ है,

गीत कई गुनगुनाने हैं अभी,

और समय ही अपना साज़ है ||

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This Post is written for Indispire Edition 97: What is that one passion which you would love to restart in your life again? #lostpassion