Theme reveal: #BlogchatterA2Z

Hola!

I am back again with A2Z this year. And my theme would be:

“Short poems: Haiku / Senryu or just a couplet”

Tada…

So, it will be just a minute long read but I am sure, the effect would last much longer.

Here’s an intro for the topic

Haiku Poems:

A haiku is traditionally a Japanese poem consisting of three short lines that do not rhyme.A haiku is considered to be more than a type of poem; it is a way of looking at the physical world and seeing something deeper, like the very nature of existence. It should leave the reader with a strong feeling or impression.In Japanese, there are five “moras” in the first and third line, and seven in the second, following the standard 5-7-5 structure of haiku. A mora is a sound unit, much like a syllable, but is not identical to it. This rhythm is often lost in translation, as not every English word has the same number of syllables, or moras, as its Japanese counterpart. Many modern western poets do not subscribe to the 5-7-5 pattern. The poets recognizes this evolution, but maintains that several core principles remain woven into the tapestry of modern haiku. That is, a haiku still focuses on one brief moment in time, employs provocative, colorful imagery, and provides a sudden moment of illumination. In Japanese, haiku are traditionally printed in a single vertical line, while haiku in English usually appear in three lines, to parallel the three metrical phrases of Japanese haiku. The essential element of form in English-language haiku is that each haiku is a short one-breath poem that usually contains a juxtaposition of images.

Senryu:

Senryu is a Japanese form of short poetry similar to haiku in construction: three lines with 17 or fewer morae (or on) in total.  However, senryu tend to be about human foibles while haiku tend to be about nature, and senryu are often cynical or darkly humorous while haiku are more serious.

Couplet:

A two line poem which usually rhyme.

They may be some fancy words but I usually write in hindi and love to see y’all smile through my poems.

 

Don’t forget to stop by for a minute and have a nice read.

Seeyaa!!

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क़ुर्बत-ए-स्याही : #BlogchatterA2Z

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इतने समय से लिखते हुए अब ये महसूस होने लगा है कि मेरा और काव्य का कोई न कोई नाता ज़रूर है…

इन  अल्फाज़ों  का  काग़ज़  से  ज़रूर  कोई  नाता  है,
के  मिलती  नहीं  जिसे  ज़बान, वो  अनायास  ही  इसपर  उतर  आता  है ||

♥ ♥ ♥                                doc2poet

कैसे  न  लिखूं  ?

चाँद  सा  धवल  ये  काग़ज़,

बेचैन  लहरों   सी  मचलती  स्याही,

कैसे  ना  उठे  लफ़्ज़ों  का  तूफान,

हर  ज़र्रा  दे  संयोग  की  गवाही,

जैसे  रूह   को  मिल  गया  हो  इलाही,

रूह   को  मिल  गया  हो  इलाही ||

♥ ♥ ♥                                doc2poet

काव्य- हाइकू

खुला  नीला  आकाश,

अंतर्मन  की  उड़ान,

शब्दों  ने  रूप  लिया  काव्य  का ||

♥ ♥ ♥                                doc2poet

अगर आपको मेरी कविताएँ पसन्द आयें तो मेरी पुस्तक “मन-मन्थन : एक काव्य संग्रह” ज़रूर पढ़ें| मुझे आपके प्यार का इन्तेज़ार रहेगा |

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अस्तित्व: #BlogchatterA2Z

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                कविताओं से मेरी मुलाक़ात कुछ समय पहले ही हुई; लेकिन दिल्ली की भाग दौड़ के बीच, पेशे से डॉक्टर होते हुए भी काव्य रचना ने मेरा दमन थामे रखा है | इन कविताओं और शब्दों के ज़रिए मैने अपने मन का हर कोना टटोलकर देखा है और इन्होंने मुझे वो बनने में  महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है जो मैं आज हूँ | कम शब्दों में कहूँ तो इन कविताओं में मैने अपना अस्तित्व पाया है | मैने जाना के इतना सब जानकर भी हम अज्ञानता के अँधेरे को पार नहीं कर सके हैं…

असीम  ज्ञान  का  सागर,

बहती  धाराएँ,

कूपंन्डुक  मैं  निराधार ||

♥ ♥ ♥                           -doc2poet 

लेकिन फिर भी हमें अपने आप को केवल अपनी ही नज़रों से परखना चाहिए…

उनकी नज़रों में तो मेरा गुलशन भी ख़ाक है,

पर आँखें दो मैं भी लिए बैठा हूँ,

फिर उनकी किसे फिराक़ है ||

♥ ♥ ♥                          -doc2poet    

अपनी सीमाओं को पहचानने की कोशिश मैने इन पंक्तियों में की है…

पाँव  ज़मीं  पर  नहीं  मेरे,

के  इन  बादलों  पे  सवार  हूँ  मैं;

के  मैं  हूँ, और  मेरी  तन्हाई,

और  इस  ज़माने  के  पार  हूँ  मैं;

बेफ़िक्र  हूँ, बेखौफ़  हूँ,

के  मद्धम  जलती  अंगार  हूँ  मैं;

मैं  किल्कारी, मैं  आँसू  भी,

के  दामन  से  छलकता  प्यार  हूँ  मैं;

मैं  मुश्किल  हूँ, मैं  आसां  भी,

कभी  जीत  हूँ  तो, कभी  हार  हूँ  मैं;

उलझनों  की  इस  कशमकश  में,

उमीदों  की  ललकार  हूँ  मैं;

लुत्फ़  उठा  रहा  हूँ, हर  मुश्किल  का,

भट्टी  में  तपती  तलवार  हूँ  मैं;

ये  लहरें  ये  तूफान, तुम्हें  मुबारक,

के  कश्ती  नहीं  मझधार  हूँ  मैं;

मैं  मद्धम  हूँ, मैं  कोमल  हूँ,

और  चीते  सी  रफ़्तार  हूँ  मैं;

के  दर्दभरी  मैं  चीखें  हूँ,

और  घुँगरू  की  झनकार  हूँ  मैं;

मैं  निर्दयी  हूँ, मैं  ज़ालिम  हूँ,

के  मुहब्बत  का  तलबगार  हूँ  मैं;

मैं  शायर  हूँ, मैं  आशिक़  भी,

इस  प्रेम-प्रसंग  का  सार  हूँ  मैं;

तुम  मुझसे  हो, मैं  तुमसे  हूँ,

झुकते  नैनों  का  इक़रार  हूँ  मैं;

मैं  गीत  भी  हूँ, मैं  कविता  भी,

के  छन्दो  में  छुपा, अलंकार  हूँ  मैं;

मैं  ये  भी  हूँ, मैं  वो  भी  हूँ,

के  सीमित  नहीं  अपार  हूँ  मैं,

के  सीमित  नहीं  अपार  हूँ  मैं ||

♥ ♥ ♥                      -doc2poet    

अगर आपको मेरी कविताएँ पसन्द आयें तो मेरी पुस्तक “मन-मन्थन : एक काव्य संग्रह” ज़रूर पढ़ें| मुझे आपके प्यार का इन्तेज़ार रहेगा |

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