कर्तव्य : BlogchatterA2Z

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K              ये पंक्तियाँ समर्पित हैं मेरे पुत्र कर्तव्य की मीठी मुस्कान को, उसकी नादान शरारतों को, उसकी हर एक बात को जिसमें मैं अपना भविष्य, अपना प्रतिबिम्ब, अपना सब कुछ देखता हूँ |

तू  काव्य  मेरा, कर्तव्य  मेरा,
तू  भूत, वर्तमान, भविष्य  मेरा;

तू  अठखेली, तू  ही  बचपन,
उगता  सूरज  तू  भव्य  मेरा;

तू  गर्व  मेरा, ऐश्वर्य  मेरा,
तुझसे  ही  भाग्य  अदम्य  मेरा;

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My son- Kartavya

तुझसा  दूजा  कोई  भी  नहीं,
के  तू  है  प्रदेय  अनन्य  मेरा;

मैं  चलूँ  तू  मंज़िल  पा  जाए,
के  तू  ही  है  गंतव्य  मेरा,   

कर्तव्य  मेरा,  गंतव्य  मेरा||

♥ ♥ ♥                                       doc2poet

अगर आपको मेरी कविताएँ पसन्द आयें तो मेरी पुस्तक “मन-मन्थन : एक काव्य संग्रह” ज़रूर पढ़ें| मुझे आपके प्यार का इन्तेज़ार रहेगा |

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